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बाघों की गिनती में मध्य प्रदेश शीर्ष पर बरकरार : मुख्यमंत्री चौहान ने दी जनता को बधाई
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को प्रदेश के लोगों को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में बाघों की संख्या 2018 की 526 से बढ़कर 2022 में 785 हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने भी मध्य प्रदेश को भारत के अग्रणी बाघ राज्य का दर्जा बरकरार रखने के लिए बधाई दी। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा जारी रिपोर्ट ‘भारत में बाघों की स्थिति : 2022’ के अनुसार, ‘‘देश में बाघों की सबसे अधिक संख्या मध्य प्रदेश में है, इसके बाद कर्नाटक (563) और उत्तराखंड (560) आते हैं।’’ सर्वेक्षण के अनुसार, मध्य प्रदेश के जंगलों में चार साल की अवधि में 259 बाघ बढ़े हैं। चौहान ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘यह बेहद खुशी की बात है कि हमारे राज्य के लोगों के सहयोग और वन विभाग के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप चार वर्षों में हमारे राज्य में बाघों की संख्या 526 से बढ़कर 785 हो गई है।’’इस सफलता के लिए प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए उन्होंने आगे कहा, ‘‘आइए हम सब मिलकर अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर भावी पीढ़ियों के लिए प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लें।’’ मध्य प्रदेश में 2006 में बाघों की संख्या 300 थी, लेकिन 2010 में मध्य प्रदेश अपने नंबर एक स्थान से फिसल गया था क्योंकि कर्नाटक में बाघों की संख्या 300 के मुकाबले मध्य प्रदेश में घटकर 257 रह गई। कर्नाटक में 2014 में बाघों की संख्या 406 थी जबकि मध्य प्रदेश में 300 बाघ थे। इसके बाद मध्य प्रदेश में बाघों की आबादी बढ़ गई और 2018 में कर्नाटक में 524 के मुकाबले 526 बाघों के साथ मध्य प्रदेश ने शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। मध्य प्रदेश में छह बाघ अभयारण्य, कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना, पेंच, सतपुड़ा और संजय-दुबरी हैं। केंद्रीय मंत्री यादव ने भी ट्विटर पर मध्य प्रदेश को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।उन्होंने कहा कि नवीनतम बाघ आकलन अभ्यास के अनुसार 785 बाघों के साथ, मध्य प्रदेश भारत का अग्रणी बाघ राज्य है। यह स्थानीय समुदायों को शामिल करके गहन सुरक्षा और निगरानी के माध्यम से बाघों के संरक्षण के प्रति मध्य प्रदेश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

 

 

 

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