उत्तराखण्ड

लेखक गांव में राग, भजन और वादन की सुरलहरियों से गूंजा ‘विरासत कला उत्सव’

-डॉ. अवधेश प्रताप सिंह तोमर की शास्त्रीय गायकी और छत्तीसगढ़ की लवली शर्मा के वादन ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

देहरादून। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं लेखक गाँव, थानों, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय “विरासत कला उत्सव” के दूसरे दिन शास्त्रीय संगीत और वादन की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रागों की गूंज, सुरों की मधुरता और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच पूरा सभागार सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर हो उठा ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. जयपाल चौहान, राज्य मंत्री, उत्तराखंड सरकार एवं उपाध्यक्ष, उच्च शिक्षा उन्नयन समिति द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक डॉ. अवधेश प्रताप सिंह तोमर ने अपनी भावपूर्ण गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने शास्त्रीय गायन के अंतर्गत राग जोगकोन्स में विलंबित ख्याल “अब तो नंदलाल” को ताल रूपक में निबद्ध कर प्रस्तुत किया। इसके पश्चात द्रुत ख्याल “अब की बार लीजो उबार” को तीनताल में सुनाया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन “नहीं ऐसो जनम बारम्बार” तथा “पतितों का एक सहारा रघुवर है नाम तिहारा” प्रस्तुत किए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
संगत में हारमोनियम पर अभरुद्र तिवारी, तबले पर शैलेन्द्र राजपूत तथा तानपुरे पर कु. धुंन तोमर ने कलाकार का प्रभावी साथ दिया। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ से आईं कलाकार लवली शर्मा ने अपने प्रभावशाली वादन की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में एक अलग ही रंग भर दिया। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। इस अवसर पर थानो के ग्राम प्रधान चंद्रप्रकाश तिवारी, डॉ. बेचैन कन्डियाल, अनिल शर्मा, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के सचिव बालकृष्ण चमोली, डॉ. प्रदीप कोठियाल, प्रो. जी.एस.इन्दौरिया, शिवम ढोंडियाल, हरेन्द्र नेगी सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *