उत्तराखण्ड

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने राष्ट्रपति पदक विजेता गोपाल बिष्ट, जैविक खेती से पेश कर रहे मिसाल

देहरादून। कहते हैं कि देश और समाज की सेवा करने का कोई तय वक्त या वर्दी नहीं होती। इस बात को सच साबित कर दिखाया है भवाली (भीमताल) के रहने वाले गोपाल बिष्ट ने। उत्तराखंड अग्निशमन सेवा से रिटायर्ड होने के बाद जहां लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं। वहीं गोपाल बिष्ट ने अपनी माटी से जुड़कर समाज को एक नई दिशा देने का फैसला किया। आज वे अपनी उत्कृष्ट जैविक खेती के जरिए न सिर्फ पहाड़ों में स्वरोजगार की मिसाल पेश कर रहे हैं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए एक बड़े रोल मॉडल बनकर उभरे हैं। गोपाल बिष्ट का अग्निशमन सेवा का कार्यकाल उपलब्धियों और अटूट कर्तव्यनिष्ठा से भरा रहा है। संकट के समय लोगों की जान-माल की रक्षा करने वाले गोपाल बिष्ट को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है। गृह मंत्रालय के अधीन अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं होमगार्ड द्वारा उत्कृष्ट अग्निशमन सेवाओं के लिए गोपाल बिष्ट प्रशंसा एवं कांस्य डिस्क सम्मान से नवाजे जा चुके हैं।

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