कालान्तर में जाख से सरूणा ही काला भण्डारी वंश की चार थ्वाकों का ऐतिहासिक विस्तार

वीरेन्द्र सिंह भण्डारी, सरूणा। वीर शिरोमणि भड़ माधोसिंह भण्डारी के द्वितीय पुत्र गजे सिंह भण्डारी की वंशधारा का प्रमुख केन्द्र जाख क्षेत्र रहा। लोकपरम्पराओं, वंशावलियों और जनश्रुतियों के अनुसार जाख गाँव, पिलखी का सेरा तथा कालों कोटी से सम्बद्ध जागीरी अधिकार गजे सिंह भण्डारी की विरासत का भाग माने जाते हैं। यद्यपि कालों कोटी में काला भण्डारी वंश की कोई स्थायी बसावट विकसित नहीं हुई, तथापि वह उस जागीरी व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता था जो वीर शिरोमणि भड़ माधोसिंह भण्डारी की सेवाओं और पराक्रम की स्मृति से जुड़ी हुई थी।
जाख गाँव समय के साथ काला भण्डारी वंश की सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र बन गया। यहीं पर वंश की शक्ति, संगठन और समृद्धि का विस्तार हुआ। इसी समृद्धि के प्रतीक के रूप में जाख में दो प्रतिष्ठित पारिवारिक केन्द्र विकसित हुए, जिन्हें मल्ला कौठा और तल्ला कौठा के नाम से जाना गया।
मल्ला कौठा बड़े भाई कर्ण सिंह भण्डारी की शाखा का केन्द्र था, जबकि तल्ला कौठा सौभाग सिंह भण्डारी की शाखा का प्रमुख निवास स्थल था। ये दोनों कौठे केवल भवन नहीं थे, बल्कि वंश की एकता, प्रतिष्ठा, सामाजिक नेतृत्व और सामूहिक शक्ति के प्रतीक थे। यहाँ पारिवारिक निर्णय लिए जाते थे, धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न होते थे और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता था। समय के साथ परिवारों की संख्या बढ़ने लगी। नई पीढ़ियाँ विकसित हुईं, कृषि भूमि की आवश्यकता बढ़ी और नई बसावटों की खोज प्रारम्भ हुई। जाख के आसपास की भूमि सीमित थी, जबकि परिवार निरन्तर विस्तार कर रहे थे। ऐसी परिस्थितियों में वंश की कुछ शाखाओं ने नई संभावनाओं की तलाश में जाख से बाहर निकलकर अन्य क्षेत्रों में बसने का निर्णय लिया। इसी ऐतिहासिक प्रक्रिया के अंतर्गत जाख के मल्ला कौठा से काला भण्डारी वंश की चार प्रमुख शाखाएँ, जिन्हें स्थानीय गढ़वाली भाषा में “थ्वाक” कहा जाता है, सरूणा में आकर स्थापित हुईं। यही चार थ्वाक आगे चलकर सरूणा में काला भण्डारी वंश की सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संरचना की आधारशिला बनीं।
प्रथम थ्वाक : जैठा सिंह भण्डारी की शाखा
मल्ला कौठा के प्रतिष्ठित पुरुष जैठा सिंह भण्डारी के पाँच पुत्र थे—
सुजान सिंह भण्डारी
पंचम सिंह भण्डारी
भगत सिंह भण्डारी
जलम सिंह भण्डारी
केशर सिंह भण्डारी
इन पाँच भाइयों में से सुजान सिंह भण्डारी और केशर सिंह भण्डारी सरूणा आकर बसे। इनके माध्यम से सरूणा में काला भण्डारी वंश की प्रथम थ्वाक स्थापित हुई। इस शाखा ने आगे चलकर ग्राम के कृषि विकास, सामाजिक संगठन तथा सांस्कृतिक परम्पराओं को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
द्वितीय थ्वाक : छैंणा सिंह भण्डारी (छैंणू) की शाखा
मल्ला कौठा की दूसरी महत्वपूर्ण शाखा छैंणा सिंह भण्डारी, जिन्हें स्थानीय परम्परा में छैंणू कहा जाता था, से सम्बन्धित थी।
छैंणा सिंह भण्डारी अपने दोनों पुत्रों—
काला सिंह भण्डारी
मोहन सिंह भण्डारी
के साथ सरूणा आकर बसे।
इनके आगमन से सरूणा में दूसरी थ्वाक की स्थापना हुई। यह शाखा अपने साथ जाख की परम्पराएँ, पारिवारिक संस्कार और संगठन की परिपक्व परम्परा लेकर आई। काला सिंह भण्डारी और मोहन सिंह भण्डारी के वंशजों ने आगे चलकर सरूणा में इस शाखा को मजबूत आधार प्रदान किया।
तृतीय थ्वाक : सोहन सिंह भण्डारी की शाखा
मल्ला कौठा की तीसरी शाखा श्री सोहन सिंह भण्डारी की थी।
सोहन सिंह भण्डारी के दो पुत्र—
भाग सिंह भण्डारी
बालम सिंह भण्डारी
सरूणा आकर बसे।
इन दोनों भाइयों ने सरूणा में काला भण्डारी वंश की तीसरी थ्वाक की स्थापना की। उनके परिश्रम, कृषि कौशल और सामाजिक सहभागिता ने ग्राम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस शाखा के वंशज आगे चलकर सरूणा की सामाजिक संरचना का महत्वपूर्ण अंग बने।
चतुर्थ थ्वाक : मगन सिंह भण्डारी की शाखा
मल्ला कौठा की चौथी शाखा मगन सिंह भण्डारी की थी।
लोकपरम्पराओं के अनुसार मगन सिंह भण्डारी अपने एक पुत्र के साथ सरूणा में आकर बसे। उनके माध्यम से सरूणा में चौथी थ्वाक का उदय हुआ। यद्यपि इस शाखा की विस्तृत वंशावली का संकलन अभी शेष है, तथापि सरूणा में काला भण्डारी वंश के विस्तार में इस शाखा का स्थान भी समान रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
सरूणा में चार थ्वाकों की स्थापना
इन चारों थ्वाकों ने मिलकर सरूणा में काला भण्डारी वंश की एक सुदृढ़ सामाजिक व्यवस्था का निर्माण किया। उन्होंने कृषि भूमि का विकास किया, ग्राम की आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया, धार्मिक परम्पराओं को संरक्षित रखा और सामाजिक एकता की भावना को मजबूत किया। इन पूर्वजों ने केवल अपने परिवारों के लिए नए घर नहीं बनाए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसी सामाजिक संरचना स्थापित की, जिसने सरूणा को काला भण्डारी वंश का एक महत्वपूर्ण केन्द्र बना दिया।
आज भी सरूणा में काला भण्डारी वंश की पहचान इन चार मूल थ्वाकों से जुड़ी हुई है। ग्राम के अनेक परिवार अपनी वंश परम्परा को इन्हीं चार शाखाओं से जोड़ते हैं। इसलिए सरूणा का इतिहास केवल एक गाँव का इतिहास नहीं, बल्कि जाख के मल्ला कौठा से निकलकर नई भूमि पर अपने श्रम, संघर्ष और संगठन के बल पर स्थापित हुई उन चार गौरवशाली वंशधाराओं का इतिहास है, जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए सम्मान, एकता और सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर छोड़ी।

