उत्तराखण्ड

“ऋषिकेश में एलटी लाईन टूटने से हुई विद्युत दुर्घटना पर प्रबन्ध निदेशक, यूपीसीएल ने की कड़ी कार्यवाही-तत्काल प्रभाव से अवर अभियन्ता निलम्बित”

देहरादून:  खदरी ग्रामसभा में तेज वर्षा के बीच टूटे बिजली के तार की चपेट में आने से एक महिला व बालिका की अकस्मात मृत्यु हो गई। घटना के दौरान मौके पर उपस्थित स्थानीय लोगों द्वारा इसकी सूचना उपखण्ड कार्यालय को दी गई। करंट फैलने की सूचना प्राप्त होते ही 11 के० वी० रायवाला रूरल फीडर को बंद कर दिया गया। दुर्घटना के समय भारी बरसात हो रही थी व साथ में तेज हवा चल रही थी, जिस कारण सम्भवतः तेज हवाओं के चलने से एल०टी० लाईन का तार टूट कर कच्ची रोड़ पर भरे पानी में गिर गया एवं उसी समय एक महिला एवं उनकी 02 वर्षीय बच्ची रास्ता पार करते हुए तार की चपेट में आ गए जिस कारण से यह दुर्घटना घटित हुई।

घटना की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए प्रबन्ध निदेशक द्वारा मृतक परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की गई तथा तत्काल आपातकालीन बैठक आहूत कर प्रकरण की विस्तृत समीक्षा की गई तथा दुर्घटना के कारणों एवं परिस्थितियों की गहन जांच के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि घटना के लिए उत्तरदायित्य निर्धारित होने पर सम्बन्धित अधिकारियों / कर्मचारियों के विरूद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। उक्त प्रकरण में प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने पर शम्भू प्रसाद बहुगुणा, अवर अभियन्ता, विद्युत वितरण उपखण्ड, रायवाला को निलम्बित कर दिया गया है तथा विद्युत घटना की जाँच हेतु कार्यालय ज्ञाप 4563 दिनांक 17.08.2026 द्वारा तीन सदस्य क्रमशः ई० राजकुमार, मुख्य अभियन्ता कारपोरेट (नियोजन एवं तकनीकी सम्प्रेक्षा), ई० मोहित जोशी, मुख्य अभियन्ता (परियोजना) एवं ई० अमित कुमार, मुख्य अभियन्ता (सी०एस०एस० एण्ड ई०ए०पी०) की जाँच समिति का गठन कर तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया गया है। साथ ही, मानवीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रबन्ध निदेशक, यूपीसीएल द्वारा प्रदेशभर में विद्युत लाइनों एवं अन्य विद्युत परिसम्पत्तियों की विशेष सुरक्षा जांच एवं निवारक अनुरक्षण अभियान (Preventive Maintenance Drive) चलाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटना की पुर्नावृति ना होने पाये। इसके अंतर्गत प्रत्येक विद्युत वितरण खण्ड द्वारा अपने क्षेत्र की समी एल.टी. लाइनों की तत्काल सघन जांच कराई जाएगी तथा एल.टी लाइनों के समी ज्वाइंट, टर्मिनल, कनेक्शन एवं अन्य संवेदनशील बिन्दुओं की लोड की स्थिति में थर्मल विजन कैमरे के माध्यम से जांच कराई जाएगी। थर्मल विजन जांच के दौरान पाए जाने वाले हॉट स्पॉट, असामान्य तापमान वृद्धि अथवा अन्य विद्युत दोषों को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा तथा इस जांच एवं की गई सुधारात्मक कार्यवाही का विधिवत अभिलेख भी सुरक्षित रखा जाएगा।

इसके अतिरिक्त 33/11 केवी की एचटी लाइ‌नों एवं पोलों, वितरण परिवर्तकों (डी.टी आर.), एल.टी. लाइनों, बेयर एल टी / वीजल एवं एल.टी. एबी.सी. नेटवर्क, ज्वाइंट, कनेक्शन, इंसुलेटर, अर्थिग, सुरक्षा एवं प्रोटेक्शन व्यवस्था सहितसमस्त सम्बन्धित विद्युत प्रतिष्ठानों का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। विशेष रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों, सार्वजनिक आवागमन वाले मार्गों, बाजारों, घनी आबादी वाले क्षेत्रों, विद्यालयों, चिकित्सालयों तथा अन्य संवेदनशील स्थलों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही की जाएगी। कमजोर अथवा क्षतिग्रस्त पोल, असुरक्षित कंडक्टर, खराब ज्वाइंट / कनेक्शन, अत्यधिक झुकाव वाले पोल, अपर्याप्त विद्युत क्लियरेस तथा जलभराव से उत्पन्न संभावित जोखिमों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। जहां तत्काल स्थायी सुधार संभव नहीं होगा, वहां विद्युत आपूर्ति को सुरक्षित रूप से पृथक करने, बैरिकेडिंग अथवा अन्य आवश्यक सुरक्षात्मक उपायों के माध्यम से संभावित दुर्घटना की रोकथाम की जाएगी। इसके अतिरिक्त, विद्युत आपूर्ति के किसी वैकल्पिक स्रोत अथवा बैक-फीड की संभावना की भी जांच कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी पृथक किए गए विद्युत क्षेत्र में अनजाने में विद्युत प्रवाह न बना रहे।

प्रत्येक डिवीजन को अपने क्षेत्र में विद्युत सुरक्षा की दृष्टि से 20 सर्वाधिक संवेदनशील स्थलों को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्यवाही करने तथा की गई कार्यवाही की रिपोर्ट मुख्यालय को निर्धारित समयसीमा में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए है। सम्बन्धित अधीक्षण अभियन्ता एवं अधिशासी अभियन्ता द्वारा अभियान की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की जाएगी तथा उपखण्ड अधिकारियों एवं अवर अभियन्ताओं द्वारा स्थलीय सत्यापन एवं चिन्हित कमियों के वास्तविक निराकरण की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रबन्ध निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि विद्युत सुरक्षा मानकों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, विलम्ब अथवा उदासीनता को गंभीरता से लिया जाएगा और निर्धारित दायित्वों के निर्वहन में कमी पाए जाने पर सम्बन्धित अधिकारी / कर्मचारी की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।

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