सिद्धपीठ कालीमठ में नवरात्र की तैयारियां पूर्ण, 5 क्विंटल फूलों से सजा मां काली का दरबार
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के प्रमुख शक्तिपीठों में शुमार सिद्धपीठ कालीमठ तीर्थ में बासंती (चैत्र) नवरात्र को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आज से विधि-विधान और पौराणिक परंपराओं के साथ नौ दिवसीय नवरात्र अनुष्ठान का शुभारंभ होगा। आस्था, शक्ति और साधना के इस केंद्र में मां काली, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
नवरात्र पर्व को भव्य बनाने के लिए मुख्य मंदिर और परिसर को विभिन्न प्रजातियों के पांच क्विंटल फूलों से सजाया गया है। कालीमठ मंदिर प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया कि गाजियाबाद निवासी श्रीजल मिश्रा और विपिन चंद्र भट्ट के विशेष सहयोग से मंदिर का श्रृंगार किया गया है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर समिति द्वारा पेयजल, प्रकाश और स्वच्छता के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू होने से पूरी कालीमठ घाटी में रौनक लौटने लगी है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कालीमठ वही स्थान है जहां मां काली ने असुर रक्तबीज का संहार किया था। यहां देवी की प्रतिमा के स्थान पर एक पवित्र कुंड की पूजा की जाती है, जो इसे अन्य शक्तिपीठों से विशिष्ट बनाता है। केदारनाथ यात्रा मार्ग के समीप स्थित होने के कारण यात्री यहाँ दर्शन कर अपनी यात्रा पूर्ण मानते हैं।
पंडित दिनेश चंद्र गौड़ के अनुसार, नवरात्र के दौरान मंदिर में दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन-यज्ञ और विशेष अनुष्ठानों का आयोजन होगा। बद्री-केदार मंदिर समिति सहित स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों में इस उत्सव को लेकर भारी उत्साह है। प्रतिदिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा से क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा। मंदिर समिति ने स्पष्ट किया कि बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं चाक-चौबंद हैं। स्थानीय प्रशासन और समिति के आपसी समन्वय से भीड़ नियंत्रण और पार्किंग की व्यवस्था को भी अंतिम रूप दिया गया है, ताकि भक्तों को सुगम दर्शन प्राप्त हो सकें।
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