उत्तराखण्ड

हरिद्वार मनसा देवी मंदिर से गंगोत्री धाम भेजा गया प्रसाद, 19 अप्रैल को खुलेंगे कपाट

हरिद्वार। मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट की ओर से हर साल की तरह इस बार भी गंगोत्री धाम के लिए खाद्य सामग्री से भरा ट्रक रवाना किया गया। चरण पादुका मंदिर परिसर से यह ट्रक विधिवत पूजा अर्चना के बाद गंगोत्री धाम के लिए भेजा गया, जहां मंदिर के कपाट खुलने पर इसी सामग्री से बने प्रसाद का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।
इस अवसर पर निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रामरतन गिरी महाराज ने ट्रक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वहीं गंगोत्री धाम के रावल शिव प्रकाश महाराज ने चरण पादुका मंदिर में पूजा अर्चना कर यात्रा के सफल और मंगलमय होने की कामना की। मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट द्वारा भेजी गई खाद्य सामग्री से तैयार प्रसाद हजारों श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा, जिससे धार्मिक आस्था और सेवा परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी ने कहा कि हर वर्ष गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले जिस प्रसाद का भोग लगाया जाता है, वो हरिद्वार की मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट की ओर से लगाया जाता है।
इसलिए खाद्य सामग्री से ट्रक भरकर हरिद्वार से गंगोत्री धाम भेजा गया है। उनकी मां गंगा और मां मनसा देवी से यही कामना है कि इस वर्ष भी चारधाम यात्रा अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़कर दिव्य और भव्य तरीके से संपन्न हो। गंगोत्री धाम के रावल शिवप्रकाश महाराज ने कहा कि चारधाम यात्रा को लेकर सरकार की ओर से भव्य और दिव्य तैयारियां की गई है। 18 अप्रैल को मां गंगा की दिव्य उत्सव डोली यात्रा मुखीमठ से गंगोत्री धाम के लिए प्रस्थान करेगी। पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करने के पश्चात आगामी 19 अप्रैल को 12 बजकर 15 मिनट पर गंगोत्री धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे।
मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट की ओर से भेजी गई खाद्य सामग्री से बने प्रसाद से भोग लगाया जाएगा और भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने मां गंगा और मां मनसा देवी से इस वर्ष भी चारधाम आने वाले यात्रियों के लिए सुखद और सुरक्षित यात्रा पूर्ण करने की कामना की है। गौर हो कि यह परंपरा वर्षों पुरानी है, जो बीच में किन्हीं कारणों से बंद हो गई थी, लेकिन गंगोत्री धाम के रावल शिवप्रकाश महाराज और मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज के प्रयास से इसे फिर से शुरू किया गया है। पिछले कई सालों से यह परम्परा अनवरत जारी है।

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