हेमकुंड साहिब ट्रेक मार्ग से बर्फ हटाने को पहुंचे सेना के जवान और ट्रस्ट के सेवादार
देहरादून। गोविंदघाट (चमोली गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के सेवादारों के साथ भारतीय सेना की 9(1) माउंटेन ब्रिगेड 418 इंडिपेंडेंट फील्ड कंपनी की एक टुकड़ी, जो एक सूबेदार के नेतृत्व में है, आज अरदास के बाद गोविंदघाट से घंगरिया के लिए रवाना हो गई। इस संयुक्त टीम को श्री हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के सीईओ सरदार सेवा सिंह द्वारा विदाई दी गई। लगभग एक सप्ताह पहले एक रेकी टीम ने इस मार्ग का सर्वेक्षण किया था। सर्वेक्षण के दौरान श्री हेमकुंट साहिब और अटलकोटी ग्लेशियर क्षेत्र में 8 फीट से अधिक बर्फ जमी हुई पाई गई। अब यह टीम घंगरिया में रहते हुए रोजाना ऊपर की ओर हेमकुंट साहिब की तरफ बढ़ते हुए भारी बर्फ को काटकर ट्रेक मार्ग को साफ करेगी। जवानों और सेवादारों के निरंतर प्रयासों से आशा की जा रही है कि अगले तीन सप्ताह के अंदर पूरा मार्ग साफ हो जाएगा और तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित बन जाएगा। इससे शनिवार, 23 मई 2026 को श्री हेमकुंट साहिब के पवित्र कपाट खोलने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।
प्रथम जत्थे (तीर्थयात्रियों के पहले समूह) को बुधवार, 20 मई 2026 को ऋषिकेश से रवाना किया जाना प्रस्तावित है। श्री हेमकुंट साहिब गढ़वाल हिमालय में लगभग 4,632 मीटर (15,200 फीट) की ऊंचाई पर स्थित एक अत्यंत पवित्र सिख तीर्थस्थल है। यह सात बर्फ से ढके पर्वत शिखरों से घिरा हुआ है और इसके पास क्रिस्टल-क्लियर ग्लेशियर झील (हेमकुंड या लोकपाल झील) है, जो इस स्थान को अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करती है। हिमालय की ऊंची चोटियों, शांत झील और अल्पाइन घास के मैदानों के बीच स्थित यह गुरुद्वारा आध्यात्मिक शांति और प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का अनुपम संगम है।
सिख परंपरा में इसका विशेष महत्व है क्योंकि यह दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पूर्व जन्म में तपस्या स्थल के रूप में जाना जाता है और दसम ग्रंथ में इसका उल्लेख है। यह स्थल न केवल सिखों के लिए बल्कि सभी श्रद्धालुओं के लिए आस्था, ध्यान और आध्यात्मिक जागरण का केंद्र है। प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष सरदार नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने ट्रस्ट की और से भारतीय सेना का हेमकुंट साहिब यात्रा को हर वर्ष सुरक्षित और सफल बनाने के लिए निरंतर समर्थन और निःस्वार्थ सेवा के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया । ट्रस्ट सभी सेवादारों के इस पवित्र कार्य के प्रति समर्पण के लिए भी धन्यवाद देता है।
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